रीवा-लेखरखज मोटवानी

रीवा/ आंग्ल नववर्ष के प्रथम दिन 1 जनवरी को स्थानीय सिंधु भवन में गुरुदेव बाबा हरिकृष्णदास जी उदासी का पावन 101वाँ जन्मोत्सव गंगवानी परिवार, सेंट्रल पंचायत और सर्व संगत ने अत्यंत श्रद्धा भाव और हर्षोल्लास के साथ मनाया।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्री सुखमनी साहिब के सामूहिक पाठ से हुआ। श्री गुरु ग्रन्थ साहिब की पवित्र वाणी का भोग साहिब हुआ।
इस अवसर पर विश्वविख्यात संत स्वामी हंसदास जी के संगीतमय प्रवचनों का लाभ सर्व संगत को प्राप्त हुआ। बाबा जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए स्वामी जी ने बताया कि सतगुरु बाबा हरिकृष्ण दास जी सरलता और सादगी की प्रतिमूर्ति थे।

उन्हें आडंबर बिल्कुल पसंद नहीं था। वे स्वयं बाहरी दिखावे से दूर जीवन पर्यंत एक छोटी सी झोपड़ी में रहे, परंतु अपने भक्तों को उन्होंने न सिर्फ भौतिक बल्कि अध्यात्म क्षेत्र में भी मालामाल कर दिया। आज वो शरीर के रूप के हमारे साथ नहीं है, परंतु उनकी चैतन्यता का अनुभव उनके भक्तमंडल को आज भी होता है। ऐसी महान विभूति का जन्मोत्सव रीवा नगरी में गंगवानी परिवार के द्वारा प्रतिवर्ष अत्यंत उत्साह के साथ मनाया जाता है।
कार्यक्रम के अंत में “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की शुभ भाव के साथ आरती और प्रार्थना की गई।

कार्यक्रम में जबलपुर से पधारे श्री भजनलाल जी की विशेष उपस्थिति रही।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मैहर से महेश दरयानी, झामनदास, मोहनदास गोकलानी, रीवा से सर्वश्री सरदार प्रहलाद सिंह, संतुलाल आहूजा, गुरमुखदास मोटवानी, नंदलाल कोटवानी, कन्हैयालाल मंगलानी, महेश थारवानी, ज्ञानचंद मोटवानी,रवि ठरवानी, राजकुमार टिलवानी, विजय सचदेवा, कैलाश कोटवानी, कमलेश सचदेवा, दीपक जियानी, दिलीप लेखवानी, प्रकाश तारानी, वीरेंद्र चुंगवानी, सत्यपाल चुंगवानी, पप्पू मंजानी, मनीष चंदवानी, लेखराज मोटवानी, विजय थावानी, गुलाब साहनी, मनोहरलाल गंगवानी, गिरधारीलाल गंगवानी, प्रदीप, शंकर, विशाल, अमित समस्त गंगवानी परिवार सहित नगर के गणमान्य नागरिक, महिलाएं पुरुष सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का समापन भंडारा प्रसाद के साथ हुआं




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