मनीष श्रीवास्तव
मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज विभिन्न मुद्दों को लेकर मीडिया से चर्चा करते हुए प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। कहा कि भाजपा सरकार के दो वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन प्रदेश के विज़न और अपने ही वचन पत्र की अधूरी गारंटियों पर चर्चा करने के बजाय सरकार जनता को गुमराह करने में लगी है।
पटवारी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा के मध्यप्रदेश दौरे को लेकर प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर पूछे सवाल —
सवाल १- मध्यप्रदेश के नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में निजी भागीदारी क्यों की जा रही है?
सवाल २– छिंदवाड़ा में कफ सिरप से मासूम बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन है?
सवाल ३- इंदौर के शासकीय अस्पताल में बच्चों को चूहों द्वारा कुतरने जैसी अमानवीय घटनाएं क्यों हो रही हैं?
सवाल ४- ‘साइंस हाउस’ घोटाले में लाखों फर्जी जांच कर सरकारी धन की लूट कैसे की गई?
सवाल ५- मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी क्यों है?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा
जिस राज्य में दवा ज़हर बन रही हो, मासूम बच्चों को HIV विषाक्त खून चढ़ाया जा रहा हो, नवजातों को चूहे कुतर रहे हों और अस्पतालों के आईसीयू में आग लगती हो — वहां स्वास्थ्य मंत्री की चुप्पी सरकार की संवेदनहीनता को उजागर करती है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि 23,535 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य बजट को ईमानदारी और पारदर्शिता से खर्च किया जाए, तो मध्यप्रदेश के हर नागरिक का इलाज मुफ्त संभव है। लेकिन भाजपा सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार अब छोटे-छोटे बच्चों की जान ले रहे हैं। पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी पर तंज कसते हुए कहा कि दो वर्ष पूरे होने के बाद भी सरकार यह बताने में व्यस्त है कि मुख्यमंत्री के बंगले में कौन रहता है और कौन नहीं, जबकि प्रदेश की 8 करोड़ जनता को इससे कोई सरोकार नहीं है। जनता को इलाज, इंसाफ़ और सुरक्षा चाहिए — इमारतें और प्रचार नहीं।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कथन “देश नहीं बिकने दूँगा” का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार द्वारा बनाए गए ज़िला अस्पतालों को भाजपा सरकार निजी उद्योगपतियों को सौंप रही है। यह कैसा अभिनंदन और कैसी नीति है?अंत में पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में अघोषित आपातकाल जैसे हालात बन चुके हैं। जनता उम्मीदें छोड़ चुकी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकार अब चूहों पर भी नियंत्रण नहीं रख पा रही? यदि व्यवस्था नहीं संभल सकती, तो सरकार को जवाबदेही तय करनी होगी।




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