“हिंद एवं सिंध की ख्याति प्राप्त अनुवादक ,लेखक ,राष्ट्रप्रेमी एवं खोजना कार शख्सियत हशु केवल रामानी जी का 111 जन्मदिन इंदौर की संस्था सिंधु सुजाग संगत द्वारा मनाया गया।

हशु की निजी ज़िंदगी पर बात करते हुए लेखक एवं शायर हरीश शेवानी ने इन पंक्तियों से शुरुआत की “इंसान हुयो अरमान हुयो नादान हुयो हुन कोन कयो को समझौतो ऐ काश हुनजो मां जूतो कंहिं वक्त खणा ऐं काश हुनजी ठोड़ मथां ऐॾो त हणा ऐॾो त हणा हू हशू हुयो”।

देश के प्रति लगाव पर एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि जब विस्थापन की बात चली तो हशु ने अपने वतन को छोड़ने से इनकार कर दिया था। हशु ने सिर्फ इतनी मांग रखी कि मुझे एक खटिया जितनी जगह दीजिए मैं जी लूंगा परंतु हालात से मजबूर आखिरकार उनको देश छोड़ना ही पड़ा। इसकी टीस उसके अंदर जिंदगी भर रही। शायर नमोश तलरेजा ने भी उनसे जुड़ी बातों को याद करके बताया कि वह एक निडर व्यक्तित्व के धनी थे। जिंदगी के अंतिम समय में उनका मानसिक संतुलन इस कदर बिगड़ गया था कि उनके अंत का कहीं कोई जिक्र नहीं मिलता है ।वह अपनी बात को निडरता से रखते थे। समाज सेवी संदीपन आर्य ने इस मौके पर अपने विचार रखते हुए कहा कि ऐसी महान हस्ती के बारे में जानकर बेहद गर्व महसूस हो रहा है। लेखिका विनीता मोटलानी ने कहा कि हशु केवल रामानी के व्यक्तित्व से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। हमें वक्त वक्त पर ऐसी शख्सियत को याद करना चाहिए ताकि नौजवान पीढ़ी अपने जड़ों से जुड़ी रहे ।
इस अवसर पर सपना हरियाणी, सोना गुलानी, राज गुलानी, विवेक तलरेजा, दीक्षा चंचलानी, रीमा, उमी, डोली वाधवानी, पूजा, सभा चांदनी आदि उपस्थित रहे।




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