जॉइंट डायरेक्टर पब्लिक रिलेशंस श्री मुकेश मोदी जी से मेरी लगभग 40 वर्ष की मैत्री है। वर्ष 2025 के आखिरी दिन वे सेवानिवृत हुए। जनसंपर्क के साथियों ने उन्हें आत्मीय विदाई दी।
मैं झीलों की नगरी भोपाल आया तो प्रारंभ में जो मित्र बने,उनमें मुकेश मोदी जी भी हैं।
वैसे हमारी लंबी दोस्ती के अनेक रोचक किस्से हैं। यहां सिर्फ एक उदाहरण दे रहा हूं।
एक दिन हम लोगों ने सेकंड शो फिल्म देखने का प्लान किया। सोशल मीडिया का आगमन नहीं हुआ था तो इतना चौकन्ना नहीं रहना पड़ता था कि दो-तीन घंटे फिल्म आराम से नहीं देखी जा सके।
ऑफिस से काम काज निपटाकर मैं रात्रि 8:30 पर घर पहुंचा था। मुंह हाथ धोकर खाना खाने बैठ गया था। लगभग 8:45 पर मुकेश जी का फोन आया। रंग महल आ जाओ फिल्म अच्छी है आखिरी शो है। देख लें।
शो शुरू होने का समय 9:00 बजे था।मुकेश जी मालवीय नगर में रहते हैं वे तो वॉक करते हुए ही थियेटर पहुंच गए।
उनकी कदमताल तेज भी है। उन्होंने मुझे कहा कि आप दोपहिए से जल्दी आ जाओ।
मैंने आज्ञा पालन किया।

वे टू व्हीलर पार्किंग की पर्ची कटवा कर और फिल्म की टिकट लेकर सिनेमा घर के द्वार पर दूर से हाथ हिलाते हुए चिर परिचित मुस्कान के साथ दिख गए।
मुझे तुलसी नगर से रंगमहल पहुंचने में मुश्किल 5 मिनट लगे थे। अचानक फिल्म
देखने की योजना बन जाए और उसका क्रियान्वयन हो जाए यह संभव हो जाता है यदि आपकी फ्रीक्वेंसी मिलती हो।
मुकेश जी के साथ ऐसी ही बॉन्डिंग रही है।
एक मित्र ने पूछा यह मुमकिन कैसे हुआ कि सिर्फ पंद्रह मिनट में आप प्लान कर फिल्म देखने पहुंच गए। बताइए ना कैसे मुमकिन हो गया ?
मैंने सिर्फ एक पंक्ति में उत्तर दिया “मोदी है तो मुमकिन है।”
-अशोक मनवानी-जनसम्पर्क प्रभारी संयुक्त संचालक।




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