मध्य प्रदेश में 8 आबकारी लाइसेंस निलंबित, हाईकोर्ट ने भी नहीं दी राहत
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कंपनी की याचिका खारिज, आबकारी विभाग की कार्रवाई को न्यायालय ने माना वैध; मामला अभी भी कानूनी प्रक्रिया में
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भोपाल।
मध्य प्रदेश की प्रमुख शराब निर्माता कंपनी सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रुअरीज को बड़ा झटका लगा है। कंपनी एवं उसकी संबद्ध इकाइयों के 8 आबकारी लाइसेंस निलंबित किए जाने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया है।
अदालत ने माना कि आबकारी विभाग को नियमों के तहत कार्रवाई करने का अधिकार है तथा शराब का व्यापार मौलिक अधिकार नहीं है। कंपनी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए आगे कानूनी लड़ाई जारी रखने का निर्णय लिया है।
मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय आना शेष है।
सिन्धू प्रभात न्यूज “सत्य के साथ, समाज के साथ”
सोम डिस्टिलरीज के लाइसेंस निलंबन का मामला गरमाया, हाईकोर्ट ने कंपनी को नहीं दी राहत
भोपाल। मध्य प्रदेश की प्रमुख शराब निर्माता कंपनी सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रुअरीज से जुड़ा लाइसेंस निलंबन मामला एक बार फिर चर्चा में है। मध्य प्रदेश आबकारी आयुक्त द्वारा कंपनी एवं उसकी संबद्ध इकाइयों के आठ आबकारी लाइसेंस निलंबित किए जाने के बाद मामला न्यायालय पहुंचा, जहां मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कंपनी की याचिका खारिज कर दी।
कंपनी का तर्क था कि जिस कारण बताओ नोटिस के आधार पर कार्रवाई की गई, वह वर्ष 2023-24 से संबंधित था तथा बाद के वर्षों 2024-25 एवं 2025-26 के लिए लाइसेंस नए सिरे से जारी किए गए थे। इसलिए पुराने मामले के आधार पर वर्तमान लाइसेंसों को निलंबित करना उचित नहीं है। हालांकि राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि आबकारी नियमों के उल्लंघन के मामलों में विभाग को कार्रवाई का अधिकार प्राप्त है।
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि शराब का व्यापार मौलिक अधिकार नहीं है और आबकारी कानूनों के अंतर्गत सरकार को नियामकीय कार्रवाई करने का अधिकार है। अदालत ने यह भी माना कि गंभीर आरोपों की जांच और कार्रवाई में समय लगने मात्र से विभाग की कार्रवाई अवैध नहीं हो जाती।
मामले में कंपनी ने बाद में डिवीजन बेंच का दरवाजा खटखटाया, जहां उसे आंशिक राहत मिली और उसकी संबद्ध इकाई को देशी शराब निविदा प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति दी गई। हालांकि लाइसेंस निलंबन का मूल मामला अभी भी अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा में है।
उल्लेखनीय है कि सोम समूह पूर्व में रायसेन स्थित इकाई में कथित बाल श्रम प्रकरण को लेकर भी विवादों में रहा है, जिसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई की गई थी।




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