भोपाल | ब्यूरो मनीष श्रीवास्तव
राजधानी में गैस वितरण व्यवस्था में एक बड़े फर्जीवाड़े की बू आ रही है। भगवती प्रसाद शर्मा की इंडेन गैस एजेंसी (अहमदपुर इंडेन ग्रामीण वितरक) द्वारा किए गए 6,000 गैस कनेक्शनों के दावे ने न केवल खाद्य विभाग, बल्कि पेट्रोलियम मंत्रालय के सुरक्षा मानकों को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। इंडेन कंपनी द्वारा इस संख्या की पुष्टि न करना यह संकेत दे रहा है कि राजधानी की सीमाओं के भीतर नियमों को ताक पर रखकर एक अवैध वितरण तंत्र खड़ा किया गया है।
नहीं दी गई कोई अनुमति–
मामले की गंभीरता को देखते हुए इंडियन ऑयल के सेल्स ऑफिसर ने खाद्य विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट बताया कि इस एजेंसी पर तत्काल कार्रवाई की जाए। सेल्स ऑफिसर के अनुसार, एजेंसी को भोपाल के इन क्षेत्रों में वितरण की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई है। मैदानी अधिकारियों (Field Officers) को सतर्क कर दिया गया है कि यदि एजेंसी अपने निर्धारित क्षेत्र से बाहर पाई जाती है, तो सख्त एक्शन लें।6,000 संदिग्ध कनेक्शनों का रिकॉर्ड मंगवाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में श्यामपुर एजेंसी के कुछ कनेक्शन ट्रांसफर किए गए थे, लेकिन इस एजेंसी को ऐसे किसी भी बड़े स्तर पर कनेक्शन नहीं सौंपे गए हैं।
सीहोर से सप्लाई पर गंभीर सवाल
जांच और साक्ष्यों से पता चलता है कि यह एजेंसी मुख्य रूप से अहमदपुर, जिला सीहोर (पिनकोड: 466665) के लिए अधिकृत है।
- क्षेत्राधिकार का उल्लंघन: नियमों के अनुसार, सीहोर की एजेंसी भोपाल में घरेलू सप्लाई नहीं दे सकती।
- अवैध परिवहन: सीहोर से सिलेंडर लाकर भोपाल में खपाना ‘तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (प्रदाय और वितरण विनियमन) आदेश, 2000’ और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 का सीधा उल्लंघन है।
जाँच के मुख्य बिंदु और कार्रवाई के संकेत
खाद्य आपूर्ति नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन के नेतृत्व में विभाग अब निम्नलिखित पहलुओं पर सख्ती बरत रहा है:
- कनेक्शन ट्रांसफर की सच्चाई: क्या ये 6,000 कनेक्शन वैध हैं? यदि कंपनी ने इन्हें ट्रांसफर नहीं किया, तो ये डेटाबेस में कैसे आए?
- सुरक्षा और लाइसेंस: बिना अनुमति एक जिले से दूसरे जिले में गैस का परिवहन जनसुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
- निरस्तीकरण की तैयारी: यदि अगले 48 घंटों में संतोषजनक रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया, तो एजेंसी का लाइसेंस निरस्त कर गोदाम सील करने की तैयारी है।
सच्चाई पर सवाल:
- अवैध सप्लाई को छिपाने की कोशिश: संचालक ने स्वीकार किया है कि वह अहमदपुर (सीहोर) की एजेंसी होने के बावजूद भोपाल के क्षेत्रों में गैस सप्लाई कर रहे थे। नियमों के अनुसार, एक जिले की ग्रामीण एजेंसी दूसरे जिले में सप्लाई नहीं दे सकती।
- दस्तावेजों का अभाव: जहाँ एक तरफ सेल्स ऑफिसर ने इस सप्लाई को अवैध बताया है, वहीं संचालक इसे ‘गरीब कल्याण’ और ‘सशस्त्र सीमा बल’ के नाम पर सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।
- जांच को प्रभावित करने का प्रयास: विभागीय सूत्रों का मानना है कि जब शिकायतकर्ता ने इस अवैध कारोबार को उजागर किया, तो उसे दबाने के लिए ‘रिश्वत’ जैसे झूठे आरोप लगाकर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई गई है।
क्या है नियमों का सच?
खाद्य विभाग की जांच पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि:
- अहमदपुर इंडेन ग्रामीणवितरक (सीहोर) का कार्यक्षेत्र भोपाल नहीं है।
- इंडियन ऑयल के सेल्स ऑफिसर ने इस एजेंसी को भोपाल में वितरण की कोई अनुमति नहीं दी है।
- 6,000 कनेक्शनों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड कंपनी के पास नहीं है। अगली कार्रवाई:
प्रशासन इस शिकायती पत्र और गैस एजेंसी के अवैध संचालन, दोनों पहलुओं की जांच कर रहा है। खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी फर्जी शिकायत के आधार पर मुख्य जांच (अवैध गैस वितरण) को रोका नहीं जाएगा। यदि शिकायत झूठी पाई जाती है, तो एजेंसी संचालक पर मानहानि और शासकीय कार्य में बाधा डालने के तहत अतिरिक्त कार्रवाई हो सकती है।




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