भोपाल | पुलिसिंग व्यवस्था में जवाबदेही और कार्यकुशलता बढ़ाने के उद्देश्य से भोपाल पुलिस कमिश्नरेट एक नई ग्रेडिंग प्रणाली लागू करने जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत अब थाना प्रभारियों (TI) का हर महीने 1000 अंकों के पैमाने पर मूल्यांकन किया जाएगा। लगातार तीन माह तक निर्धारित मानकों पर खराब प्रदर्शन करने वाले थाना प्रभारियों की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है।
पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने हाल ही में कमिश्नरेट कार्यालय में सभी थाना प्रभारियों की बैठक लेकर इस नई प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अधिकारियों को ग्रेडिंग सिस्टम, अंक वितरण और माइनस मार्किंग की प्रक्रिया समझाई गई। सूत्रों के अनुसार इस व्यवस्था का ट्रायल इसी माह शुरू किया जा सकता है।
22 बिंदुओं पर होगी थानेदारों की परख
नई प्रणाली में थाना प्रभारियों का मूल्यांकन 22 प्रमुख पुलिसिंग बिंदुओं पर किया जाएगा। इनमें आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई, गिरफ्तारी और स्थायी वारंट की तामिली, फरार अपराधियों की गिरफ्तारी, निगरानीशुदा बदमाशों पर नियंत्रण, जिलाबदर अपराधियों की मॉनिटरिंग, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, गंभीर अपराधों की विवेचना और अपराध नियंत्रण जैसे बिंदु शामिल हैं।
हर श्रेणी के लिए अलग-अलग अंक निर्धारित किए गए हैं। किसी बिंदु पर 50 अंक तो किसी पर 20 या उससे अधिक अंक मिलेंगे। महीने के अंत में सभी मानकों के आधार पर थाना प्रभारी का कुल स्कोर तैयार होगा।
खराब प्रदर्शन पर कटेंगे अंक
इस ग्रेडिंग सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि केवल अच्छे काम पर अंक नहीं मिलेंगे, बल्कि लापरवाही पर माइनस मार्किंग भी होगी। यदि किसी थाने में गंभीर अपराध बढ़ते हैं, वारंट लंबित रहते हैं, जिलाबदर बदमाशों की निगरानी कमजोर पाई जाती है या किसी फरार अपराधी को दूसरे थाना क्षेत्र की पुलिस गिरफ्तार करती है, तो संबंधित थाना प्रभारी के अंक काटे जाएंगे।
वहीं दूसरी ओर, यदि कोई थाना पुलिस दूसरे क्षेत्र के फरार अपराधी को पकड़ती है या विशेष अभियान में बेहतर प्रदर्शन करती है, तो उसे बोनस अंक दिए जाएंगे।
जवाबदेही और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की तैयारी
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से थाना स्तर पर जवाबदेही बढ़ेगी और पुलिसिंग में प्रतिस्पर्धात्मक कार्यसंस्कृति विकसित होगी। संगीन अपराधों में आरोपितों की जमानत का प्रभावी विरोध, फरार अपराधियों की गिरफ्तारी और अपराध नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले थाना प्रभारी सीधे लाभ में रहेंगे।
भोपाल पुलिस का यह प्रयोग प्रदेश की पुलिसिंग व्यवस्था में एक बड़े प्रशासनिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।




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