ब्यूरो रिपोर्ट-मनीष श्रीवास्तव
मिशन ग्रीन एनर्जी: सरकारी दफ्तरों की छतों पर अब ‘सूरज’ उगाएगा बिजली, खजाने को मिलेगी राहत
भोपाल | मध्य प्रदेश अब कोयले वाली बिजली के बजाय ‘क्लीन और ग्रीन एनर्जी’ के रोडमैप पर सरपट दौड़ने को तैयार है। मंगलवार को राजधानी के जिला पंचायत कार्यालय में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला की मौजूदगी में एक बड़ा फैसला हुआ। विभिन्न शासकीय विभागों ने ‘रेस्को मॉडल’ के तहत बिजली खरीदने के लिए विकासक इकाइयों के साथ अनुबंध (PPA) पर हस्ताक्षर किए। अब सरकारी इमारतों की खाली छतें न केवल बिजली बनाएंगी, बल्कि सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बिजली बिलों के बोझ को भी आधा करेंगी।
मंत्री की खरी-खरी: ‘हर घर की छत पर हो सोलर पैनल’
मंत्री श्री शुक्ला ने दो-टूक शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा साफ है—हमें ईंधन बचाना होगा। उन्होंने लक्ष्य तय किया कि:
बचत का गणित: जीरो इन्वेस्टमेंट, बंपर मुनाफा
अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने इस मॉडल को शासन के लिए ‘गेम चेंजर’ बताया। उन्होंने कहा कि: जीरो इन्वेस्टमेंट: विभाग को अपनी जेब से एक रुपया भी खर्च नहीं करना है।
- नेट जीरो की ओर कदम: पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पहले दिन से ही बचत शुरू। तारीख याद रखें: समय पर भुगतान तो डिस्काउंट, देरी की तो पेनल्टी:
ऊर्जा विकास निगम के एमडी अमनबीर सिंह बैंस ने अधिकारियों को कड़े वित्तीय अनुशासन का पाठ पढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली अब 3.78 रुपये प्रति यूनिट की सस्ती दर पर मिलेगी, लेकिन शर्तों के साथ:
- इनाम: 3 से 10 तारीख के बीच बिल भरा तो 1% की सीधी छूट।
- जुर्माना: देरी होने पर 1.5% की पेनल्टी लगेगी। भविष्य की राह
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा और सीईओ जिला पंचायत इला तिवारी की उपस्थिति में हुए इस अनुबंध के बाद भोपाल अब सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनने की ओर है। यह मॉडल न केवल बिजली बचाएगा, बल्कि मध्य प्रदेश को देश के सौर मानचित्र पर सिरमौर बनाएगा।




Users Today : 2
Views Today : 3
Total views : 14451