भोपाल,
कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनकी पहचान केवल उनके पद, पुरस्कार या प्रकाशित पुस्तकों से नहीं होती, बल्कि उनकी सादगी, कर्मनिष्ठा, संवेदनशीलता और लेखनी से होती है। मेरे लिए बड़े भाई अशोक मनवानी जी ऐसे ही व्यक्तित्व हैं।
हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर हिन्दी पत्रकारिता द्वि शताब्दी सम्मान से सम्मानित है। यह पुरस्कार केवल अशोक मनवानी जी का नहीं, बल्कि उन मूल्यों का सम्मान है जिन्हें उन्होंने पूरी ईमानदारी से जीवनभर जिया।
अशोक मनवानी जी को उनकी पुस्तक ‘रक्तदोष’ के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी पर जनजागरूकता पैदा करने वाली इस कृति को न केवल राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, बल्कि इस पर दूरदर्शन द्वारा टेलीफिल्म भी बनाई गई। यह बताता है कि उनकी लेखनी केवल साहित्य रचती नहीं, बल्कि समाज को दिशा भी देती है।
वर्तमान में आप मुख्यमंत्री प्रेस प्रकोष्ठ में संयुक्त संचालक के पद पर कार्यरत है और मासिक पत्रिका मध्यप्रदेश संदेश के संपादक भी हैं।
करीब 45 वर्षों से निरंतर लेखन और पत्रकारिता में सक्रिय अशोक मनवानी जी ने जिस समर्पण के साथ अपनी पहचान बनाई है, वह प्रेरणादायक है। पराग से लेकर रविवार, दिनमान, नवभारत, हिंदुस्तान, नवनीत, नई दुनिया, आदर्श पत्र, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, नवीन दुनिया और ट्रिब्यून जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में उनका योगदान पत्रकारिता की एक समृद्ध यात्रा का प्रमाण है। 18 पुस्तकों का लेखन, अनेक अनुवाद, हजारों लेख और लगभग पच्चीस राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक सम्मान उनके अथक परिश्रम की कहानी कहते हैं।
अशोक मनवानी जी की आगामी पुस्तक “बेजोड़ कलमकार राजकुमार” को लेकर जो बातें कहीं, वे मन को छू लेने वाली हैं। सचमुच, यह पुस्तक केवल वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार केसवानी जी की जीवनी नहीं होगी, बल्कि पत्रकारिता की उस नैतिक परंपरा का दस्तावेज होगी, जिसकी आज सबसे अधिक आवश्यकता है।
राजकुमार केसवानी केवल गैस त्रासदी की चेतावनी देने वाले पत्रकार नहीं थे, बल्कि साहित्य, संस्कृति, संगीत, सिनेमा और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े विलक्षण व्यक्तित्व थे। उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने का दायित्व उठाकर अशोक मनवानी जी ने पत्रकारिता और समाज दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई है। ऐसे समय में जब पत्रकारिता अनेक चुनौतियों से गुजर रही है, तब इस तरह का कार्य वास्तव में सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को संजोने का प्रयास है।
एक पत्रकार और शिक्षक होने के नाते मैं भी मानता हूं कि मीडिया के विद्यार्थियों को यह पुस्तक केवल पढ़नी ही नहीं, बल्कि महसूस भी करनी चाहिए। इससे उन्हें समझ आएगा कि पत्रकारिता केवल कैमरों की चमक, टीआरपी या वायरल खबरों का नाम नहीं है। पत्रकारिता सच के प्रति प्रतिबद्धता, समाज के प्रति जिम्मेदारी और सत्ता से निर्भीक होकर सवाल पूछने का साहस है।
अशोक मनवानी जी मेरे लिए केवल वरिष्ठ पत्रकार या लेखक नहीं, बल्कि बड़े भाई जैसे मार्गदर्शक हैं। उनका स्नेह, अपनापन, विनम्र व्यवहार और निरंतर सीखने-सिखाने की प्रवृत्ति हमेशा प्रेरित करती है। उनसे हर मुलाकात कुछ नया सिखाती है और यह एहसास कराती है कि बड़ा होने का अर्थ केवल उम्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व की ऊंचाई भी होती है।
मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि आपकी कलम इसी तरह समाज को नई दिशा देती रहे, नई पीढ़ियों को प्रेरित करती रहे और साहित्य तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करती रहे।
-राजेश गाबा ‘प्रिंस’
सीनियर एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट, दैनिक भास्कर | शिक्षक | कला एवं फिल्म समीक्षक।




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